Home विशेष मनखे संग होगे पंछी-परेवा के यारी, ”मया-दया ला धरे रहिबे संगवारी”

मनखे संग होगे पंछी-परेवा के यारी, ”मया-दया ला धरे रहिबे संगवारी”

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मनखे संग होगे पंछी-परेवा के यारी, ''मया-दया ला धरे रहिबे संगवारी''

छत्तीसगढ़िया लोगन मन अक्सर ये बात कहिथें। ”मया-दया ला धरे रहिबे संगवारी” …. ये “दया-मया” का ए? अउ “धरे रहिबे” के का मतलब होथे? एकर चर्चा हमन बाद म करबो, पहिली ये बतावन कि मनखे संग परेवा के यारी होगे हे, अइसे यारी कि परेवा हा ओकर संग नई छोड़य, जिहां जाथे ओकर खांद म बइठके संगे-संग आथे-जाथे। ओकरे संग खाथे, ओकरे संग सुतथे।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला के कोमाखान पंचायत के रहवइया मनहरण लाल अउ परेवा यानी कबूतर के बीच दोस्ती के चर्चा चारो कोती होवत हे। काबर कि इंकर दोस्ती बहुत खास हे। अखबार, टेलीविजन, वाट्सएप, यू-टयूब सब जगा इंसान अउ पंछी के दोस्ती के ये कहानी, ये सच्चा कहानी हा धूम मचा दे हे।

मनहरण हा परेवा-पंछी अउ अपन दोस्ती के कहानी बतावत किहिन- ”कुछ दिन पहिली के बात ए, मैं हा अपन काम ले रायपुर जावत रेहेंव, तभे रस्ता म ए परेवा-पंछी के लइका दिखिस, जउन हा उड़े नई सकत रिहिस। लइका मन गुलेल-गोटी मार के ओला घायल कर दे रिहिन। मैं हो ओ लइका मन ले पूछेंव – ए पंछी-परेवा के तुमन का करहू? लइका मन जवाब म किहिन- एला रांध के खाबो। फेर मैं केहेंव तुमन ये परेवा ला मोला दे दव अउ बइला म मोर ले पइसा ले लव।”
“लइका मन मान गें अउ मैं हा उंकर ले ये परेवा-पंछी ला ले लेंव। कुछ दिन तक मैं हा ये पंछी के देख-रेख करेंव। जब वो हा ठीक होगे अउ उड़े के लायक होगे, त ओला जंगल म छोड़े बर लेगेंव। जंगल म छोड़ेंव त ओ हा फेर उड़िहा के मोर खांद म बइठगे। मैं हा कई बार कोसिस करेंव कि ओला उड़िहा दंव, लेकिन ओ हा बार-बार मोर खांद म आके बइठ जाय। एकर ले मोला ये समझ आगे कि ये पंछी परेवा हा मोर संग ही रहना चाहथे।”

“समय बीतत गिस, हम दूनों झन एक-दूसर के संगवारी बन गेंन। एक-दूसर के जरूरत ला समझे लगेन। परेवा ला जब भूख लागथे त वो हा नीचे उतर जाथे। जब नींद लागथे त वो खांद म चोंच मारे लगथे।”
मनहरण बताथें कि जब वो हा काम म जाथे त परेवा ला घलो संग म ले जाथें। काबर कि ये पंछी वोला छोड़बे नई करय। जिहां भी जाथे संगे-संग जाथे। खांद म बइठे रहिथे। मनहरण हा ये पंछी ला लेके कई बार देवी दरसन बर घलो जा चुके हें। उंकर कहना हे- “पंछी भी हमर जइसे एक जीव आय, एला मारना नई चाही।”

पंछी बर मनहरण के मया ला देखके वन विभाग के बड़े अधिकारी मन घलो ओकर सराहना करत हें। उंकर कहना हे – “जीव के जान बचाना एक अच्छा काम आय, सब लोगन अइसन करना चाही, फेर वन विभाग ला सूचना देना भी जरूरी हे। वन विभाग ला जानकारी दे बिना यदि कोनो आदमी पंछी ला राखे हे, त ये दंडनीय अपराध होथे।”

मनहरण हा पंछी के जान बचाईस, ओकर ऊपर दया करके ओला सिकारी लइका मन ले छोड़ाईस, अपन संग म लाके देखरेख करिस, बने होय के बाद ओला जंगल म छोड़े के प्रयास करिस, फेर ये पंछी ओला छोड़के जाबे नई करत हे। इही हरे दया-मया के बंधना।

अब उही बात म आथंन “मया-दया ला राखे रहिबे संगवारी” अइसन कथन तेकर का मतलब होथे। एकर मतलब बस इही होथे जउन मनहरण अउ ये पंछी के दोस्ती म छिपे हे। “मया-दया ला राखे रहिबे संगवारी” अइसन कहइया मन सिर्फ अपन बर मया-दया के आस नई करय, बल्कि ये आसा करथें कि आपमन के हिरदे म प्रेम अउ दया के भावना भरे राहय। जेकर हिरदे म मया अउ दया के भावना हे ओ आदमी हा दूसर के भला अउ खुसी ही चाहथे। अउ इही दया-मया हा सुघ्घर एक-दूसर ले जोड़े रखथे।

परेवा जेला कबूतर घलो कहिथन, पुराना जमाना म संदेस वाहक रिहिन, मया के संदेस लेगंय अउ संदेस लानंय। “कबूतर जा जा जा… कबूतर जा जा जा… पहली प्यार की पहली चिट्‌ठी साजन को दे आ” ‘मैंने प्यार किया’ फिलिम के ये सुपरहिट गीत आज भी लोगन के जबान म बसे हे। कबूतर हा दुनिया भर म सांति के प्रतीक माने जाथे। आसमान म कबूतर छोड़के देस-दुनिया म सांति के कामना करे जाथे। अउ देस-दुनिया म सांति तभे बने रही, जब “मया-दया ला धरे रहिबे संगवारी” के असल भावना ला समझके सबो झन मया-दया ला धरे रहिबो।

“जय-जोहार”…. “जय-छत्तीसगढ़” – ललित मानिकपुरी, महासमुंद

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